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1.
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है। आश्चर्य है कि यह अपनी कुल जीडीपी का करीब दो फीसद हिस्सा भी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च नहीं करता। एक तरह से यह इतनी बड़ी आबादी वाले देश के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। यह ठीक है कि आयुष्मान भारत योजना जैसे सरकारी कार्यक्रमों ने करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की है। फिर भी, स्वास्थ्य क्षेत्र में अभी कई समस्याएं बनी हुई हैं। साफ है कि दूसरे विकासशील देशों की बराबरी के लिए हमें काफी कुछ करना होगा। अमर्त्य सेन भी लगातार जोर देते रहे हैं कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किसी एकीकृत कार्ययोजना की सख्त जरूरत है। उनका मानना है कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक प्रगति भी उतनी ही जरूरी है।
2.
समुद्र के बढ़ते जलस्तर से तटीय शहरों में बुनियादी ढांचे, घरों और रोजगार पर असर पड़ने लगा है। भारत के सामने चुनौती विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए तटीय इलाकों का भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती है। साल 2100 तक समुद्र स्तर में औसतन एक मीटर से अधिक की वृद्धि होने का अनुमान है। चक्रवातों और भारी बारिश के साथ बढ़ता समुद्र स्तर तटीय शहरों की नींव हिला रहा है। इस कारण मुंबई में बाढ़, चेन्नई में पेयजल संकट और ओड़ीशा में आजीविका का नुकसान हो रहा है। ये आपदाएं शहरी ढांचे, सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही हैं।
3.
शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान जलवायु माडल अटलांटिक महासागर के तापमान में होने वाले बदलावों और दुनिया के अन्य हिस्सों पर पड़ने वाले प्रभावों को सही ढंग से नहीं समझ पाते हैं। विशेष रूप से, वैज्ञानिकों ने एक ऐसे क्षेत्र पर ध्यान दिया है जिसे 'कोल्ड ब्लाब' (ठंडा जल क्षेत्र) कहा जाता है। यह उत्तरी अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के दक्षिण में स्थित ठंडे पानी का एक बड़ा क्षेत्र है। यह क्षेत्र वैश्विक मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।
4.
रुस ने भारत को अपनी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ रु विमान सुखोई एसयू-57 देने की पेशकश की है। साथ ही, सुझाया है कि इस लड़ाकू विमान का संयुक्त उत्पादन भारत में भी किया जाए। दशकों से रूस भारत का प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की वर्षों लंबी खोज के बाद, भारत ने अपनी महत्त्वाकांक्षी 'एडवांस्ड मल्टीरोल कांबैट एअरक्राफ्ट' (एएमसीए) परियोजना शुरू की है, जिसे व्यापक रूप से देश का सबसे बड़ा स्वदेशी एअरोस्पेस कार्यक्रम माना जाता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि मास्को अब भी एसयू-57 विमान, परियोजना में नई दिल्ली को शामिल करने के लिए उत्सुक है।
5.
एशिया और हिंद- प्रशांत क्षेत्र के लिए समुद्री गलियारों को अहम माना जाता है। अकेले एशिया वैश्विक कंटेनर व्यापार का लगभग 63 फीसद हिस्सा संभालता है और वैश्विक बंदरगाह गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा यहीं केंद्रित है। इस क्षेत्र का व्यापार कुछ ही संकरे मार्गों से होकर गुजरता है। अकेले मलक्का जलमार्ग से ही प्रतिदिन लगभग 23 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल पारगमन केंद्र है। पूर्वी एशिया को हिंद महासागर और उससे आगे जोड़ने वाले समुद्री मार्गों पर भी इसी तरह की स्थिति देखी जाती है। इन दिनों लाल सागर से जहाजों का मार्ग बदलना, उत्तमाशा अंतरिप (केप आफ गुड होप) के चारों ओर हफ्तों तक चक्कर लगाना, सूखे के कारण पनामा नहर पर लगे प्रतिबंध, होर्मुज को लेकर प्रतिबंधों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ा है।
6.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि इंदौर में मंगलवार से शुरू हो रही ब्रिक्स देशों की पांच दिवसीय बैठक में खाद्य सुरक्षा, स्मार्ट कृषि, वैश्विक कृषि व्यापार और किसान कल्याण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
7.
अमेरिका की तरफ से धारा 301 के तहत जांच पूरी होने के बाद ही भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। एक सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यदि अमेरिका, भारत पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाना चाहता है, तो उसे इसके लिए धारा 301 के तहत शुरू जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया का 24 जुलाई तक पूरा होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके बाद अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 फीसद का अस्थायी अतिरिक्त शुल्क समाप्त हो जाएगा और केवल सर्वाधिक तरजीही देश शुल्क ही लागू रहेंगे।
8.
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले कोष का देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के लेखापरीक्षा करने से इनके कामकाज में सुधार होगा और गांवों में जीवन यापन में सुगमता आएगी। नागेश्वरन ने कहा कि कैग लेखापरीक्षा से हमें प्रत्येक राज्य में होने वाले कार्यों के बारे वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। इससे एक ऐसा साक्ष्य आधारित आधार बनेगा जो वर्तमान में मौजूद नहीं है और संवैधानिक उद्देश्य और प्रशासनिक वास्तविकता के बीच के अंतर के लिए जवाबदेही तय होगी। उन्होंने पंचायती राज मंत्रालय से राज्य वित्त आयोगों के लिए आंकड़ों से जुड़ी समिति की इस सिफारिश को सक्रियता से लागू करने का आग्रह किया।
9.
देश में माल परिवहन में गति लाने के लिए विकसित किए जा रहे समर्पित माल-ढुलाई गलियारों से माल वाहक ट्रेनों की रफ्तार ढाई गुना तक बढ़ गई है। इन गलियारों पर आने वाले दिनों में मालवाहक ट्रेनों की औसत गति 75 किमी प्रति घंटे तक लाने की तैयारी चल रही है, जिसे भविष्य में 100 किमी प्रति घंटे तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डीएफसीसीआइएल) के प्रबंध निदेशक के प्रवीण कुमार ने बताया कि पहले माल वाहक ट्रेन और सवारी ट्रेन रेलवे की पटरियों पर ही चलती है। ऐसे में सवारी ट्रेनों को प्राथमिकता देने के कारण मालवाहक ट्रेनें समय पर अपने निर्धारित जगहों पर नहीं पहुंच पाती थी। इस कारण परिवहन लागत बढ़ जाता थी। वहीं, सामान खराब होने की आशंका भी बढ़ जाती थी। इसे देखते हुए साल 2006 में समर्पित माल ढुलाई गलियारे बनाने का फैसला लिया।
10.
देश के माल निर्यात में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद अप्रैल-मई में करीब 15 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। वाणिज्य मंत्रालय मई महीने के व्यापार आंकड़े 15 जून को जारी करेगा। अधिकारी ने कहा कि इन दो महीनों के दौरान निर्यात 15 फीसद बढ़ा है। अप्रैल में निर्यात 13.78 फीसद बढ़कर 43.56 अरब डालर रहा था जो पिछले चार वर्षों में किसी एक महीने का सबसे अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के कारण हुई जिन्हें कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से समर्थन मिला। आयात में वृद्धि के कारण हालांकि, व्यापार घाटा तीन महीने के उच्च स्तर 28.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

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