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JANSATTA

1.

साझेदारी की कसौटी

भारत और अमेरिका के बीच पिछले महीने जिस अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी, उसे लेकर कई तरह की दुविधाएं थीं और कुछ शर्तें पहले ही सवालों के घेरे में थीं। अमेरिका की ओर से जिस ढांचे में शुल्क दरें तय करने की बात कही गई थी, उसे भारत के लिहाज से घाटे का सौदा माना जा रहा था। इसमें कोई दोराय नहीं कि किसी भी व्यापार समझौते में शामिल देश तभी सहमत होते हैं, जब उन्हें विश्व बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा सुविधाएं या लाभमिलें। मगर पिछले महीने अमेरिका के साथ जिन परिस्थितियों में व्यापार समझौते पर बात आगे बढ़ी थी, उसे भारत के लिहाज से अनुकूल नहीं कहा जा सकता था। 


2.

बढ़ते तापमान से गहराता संकट

वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद से लगातार बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, औद्योगिक प्रदूषण और वनों की कटाई है। जब वातावरण में कार्बन डाइआक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ती है, तो पृथ्वी की सतह पर अधिक गर्मी बनी रहती है, जिससे वैश्विक तापमान बढ़ता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जब तापमान बहुत अधिक हो जाता है, तो शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे निर्जलीकरण, लू लगने और स्वास्थ्य की अन्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।


3.

'पीएम ई-बस' योजना को लागू करने में राज्य पिछड़े

देश में आम नागरिकों को बेहतर, किफायती व स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई 'पीएम ई-बस' योजना को लागू करने में राज्य पिछड़ गए हैं। ये बसें हरित शहरी पहल यानी ग्रीन अर्बन इनिशिएटिव्स (जीयूएमआइ) के तहत शुरू की जानी थी। साथ ही यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट' (आइटीएमएस) तथा 'नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड' (एनसीएमसी) जैसी योजनाओं को लागू करने में भी देरी हो रही है। केंद्र सरकार की संसदीय समिति ने अधिक मांग के बाद भी विलंब से चल रही इन योजनाओं पर गहरी चिंता जाहिर की है और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट कहा है कि वे इस योजना तेजी से लागू करें।


4.

तीन वर्षों में 5.18 लाख से अधिक खाद्य नमूनों की हुई जांच

सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि 2022-23 से 2024-25 की अवधि के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा विभागों तथा एफएसएसएआइ के क्षेत्रीय कार्यालयों ने 5.18 लाख से अधिक खाद्य नमूनों की जांच की। मंत्री ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (आरबीआइएस) विकसित की है, जिसमें खाद्य कारोबार संबंधी जोखिम के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति तय की जाती है और इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।


5.

नौ में से दो मरीजों को ही मिल पाता है अंगदान से जीवनदान

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 12 साल में अंगदान बढ़ाने के लिए काफी प्रयास हुए, आंकड़ा बढ़कर चार गुना तक पहुंच गया। लेकिन मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई। साल 2025 में हुए अंगदान का 82 फीसद हिस्सा जीवित व्यक्ति से मिला। इसमें सबसे ज्यादा प्रत्यारोपण गुर्दे के हुई। उसके बाद यकृत, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय, और छोटी आंत रहा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खराब जीवनशैली सहित दूसरे मामलों के कारण देश में तेजी से गुर्दे, यकृत, हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की जरूरत बढ़ रही है। सबसे ज्यादा मरीज गुर्दे प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे हैं।


6.

गुजरात : समान नागरिक संहिता संबंधी समिति ने मसविदा रपट सौंपी

गुजरात में समान नागरिक सहिंता (यूसीसी) का मसविदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने मंगलवार को अपनी विस्तृत व अंतिम रपट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी। राज्य सरकार फिलहाल चल रहे बजट सत्र के दौरान विधानसभा में यूसीसी का मसविदा विधेयक प्रस्तुत कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रपट मुख्यमंत्री को सौंपते समय एक प्रस्तुति दी।


7.

'स्वर्ण खदानों में अपशिष्ट पदार्थों के मौद्रीकरण में तेजी लाई जाए'

संसद की एक समिति ने खान मंत्रालय से कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड (केजीएफ) में स्थित भारत गोल्ड माइंस लि (बीजीएमएल) के सोने से समृद्ध लगभग 3.3 करोड़ टन अपशिष्ट भंडार के मौद्रीकरण में तेजी लाने का आग्रह किया है। सोने की खदानों के अपशिष्ट भंडार (टेलिंग डंप) ऐसे विशाल भंडारण स्थल होते हैं जिनमें सोने के खनन के बाद बचे हुए बारीक पत्थर, पानी और प्रसंस्कृत रसायन होते हैं। 


8.

गिग श्रमिकों के लिए ई-श्रम पंजीकरण अनिवार्य करे सरकार

देश में गिग कर्मचारियों के लिए ई श्रम पंजीकरण की व्यवस्था को अनिर्वाय तौर पर लागू किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त तैनात कर्मचारियों के लिए न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी और सरकार नए राष्ट्रीय मजदूरी के स्तर भी तय करे। संसदीय समिति ने यह सिफारिश केंद्र सरकार को की है ताकि श्रमिकों को राहत दी जा सके। इसके अतिरिक्त श्रम सुधार - दो के तहत स्थायी समिति ने बाल श्रम के खिलाफ समर्पित संस्थागत ढांचे की भी सिफारिश की।


9.

'भारत मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभरा'

नैसकाम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं खंडित आपूर्ति शृंखलाओं के कारण वैश्विक कंपनियां अब केवल लागत दक्षता के बजाय भरोसे तथा मजबूती को प्राथमिकता दे रही हैं जिससे भारत एक मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभर रहा है। 


10.

उद्योग की परिभाषा से संबंधित 1978 के फैसले की होगी समीक्षा

उच्चतम न्यायालय की एक संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि वह 1978 के उस फैसले की कानूनी यथार्थता की जांच करेगा जिसमें श्रम संबंधों को नियंत्रित करने के लिए उद्योग शब्द की विस्तृत व्याख्या दी गई थी। सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने बंगलुरु जलापूर्ति एवं मलजल शोधन बोर्ड की याचिका पर विचार करते हुए 21 फरवरी, 1978 को उद्योग शब्द की परिभाषा पर फैसला सुनाया था। वर्ष 1978 के इस फैसले ने 'उद्योग' की व्याख्या को इतना व्यापक कर दिया कि इसका दायरा केवल कारखानों के कर्मचारी तक सीमित न रहकर, कई अन्य क्षेत्र जैसे अस्पताल, स्कूल, क्लब और सरकारी कल्याण विभाग के कर्मचारियों तक व्यापक हो गया था और वे भी औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत अपनी श्रमिक सुरक्षा और अधिकारों का लाभ लेने के पात्र हो गए। 


11.

देश में 40 फीसद स्नातकों को नहीं मिल पा रही नौकरी

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की रपट 'भारत में कामकाज की स्थिति-2026' में पाया गया कि बेरोजगार के रूप में पंजीकरण कराने के एक वर्ष के भीतर केवल करीब सात फीसद स्नातकों को स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है। रपट में कहा गया कि स्नातक बेरोजगारी दर उच्च बनी हुई है। 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर करीब 40 फीसद और 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग में 20 फीसद है। इसमें कहा गया कि स्नातक होने के एक वर्ष के भीतर केवल एक छोटा हिस्सा ही स्थायी वेतन वाली नौकरी हासिल कर पाता है।


12.

दत्तक माताओं के लिए 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे को गोद लेना प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार का हिस्सा है और इसी के साथ उसने मंगलवार को उस कानून को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को मातृत्व अवकाश तभी मिलेगा जब वह तीन महीने से कम आयु के बच्चे को कानूनी रूप से गोद ले। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।


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